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Hansi, Harayana, India
these all poems are written by me...and my internal thinking

Monday, April 4, 2011

मेरी माँ




ये एक आत्म कथा है जो एक 8 से  9 महीने का बच्चा   बोल  रहा है ...
ये बिलकुल काल्पनिक है ....पर वो अपनी हर बात मन ही मन में कहता है ..
और अपनी माँ से बहूत प्यार करता है  .....और कुछ इस तरह से वो अपनी माँ को कहता है की .........

मैं हु जो ,वो  बतलाता नहीं .............
पर तुझ को तो सब पता है मेरी  माँ .............
मेरा दिल बहुत  छोटा सा है .........
पर तुझ को भुला न पाऊ  कभी माँ ...............
तुझे सब है पता मेरी माँ ....................
तू है सब से प्यारी माँ मेरी माँ ........................
 

दर्द में आसू आजाते है..............
पर तुझे देख , रुक जाते है माँ ..............
इन आँखों में बसी  सुरत .है तेरी .....
तो दुनिया  को क्या देखने की जरूरत है माँ .......
माँ तू कहे  की मैं हु तेरी जिन्दगी .........
पर   तुने ही तो दी ये  जिन्दगी मुझे  मा...........
तू है सब से प्यारी माँ मेरी माँ ........................


गिरता मैं, लडखडा जाता था .........
पर तुने ही तो सम्भाला मुझको माँ .......
 चोट में दर्द होता रहा .........
और आस्सू तेरी आँखों से आये माँ ........
 तू है मेरी प्यारी माँ मेरी माँ ...........

मिले मुझे हर जन्म में  तू ..........
फिर चाहे अब पड़े मरना मुझको माँ .........
पाउगा पता रहुगा किसी का  भी तो हक नहीं तुझ पे माँ ................
तू है मेरी प्यारी माँ माँ माँ ......मेरी माँ ....

मेरी माँ.............. मेरी माँ ...........मेरी माँ 


                                    धन्यवाद  

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