पहले समा ऐसा था की उसमे समा जाने का जी करता था पर अब वही समा है जो एक शम्मा की तरह भुजता नजर आ रहा है
मतलब आज की पीढ़ी और पहले की पीढ़ी में अंतर जो आज हर जगह देखने को मिलेगा .......................
कुछ इसही तरह मेरे मन के विचार है जो इस कविता में है ...........
आगया है ये कैसा समा नर्क सा लगे अब तो जीना यंहा ,पहले कभी बच्चा रोता था बाप की फटकार पर , लेकिन अब वही बेटा मरता है फटकार अपने बाप पर , जब तक था मनचाही चीजों का फेरा तो हे भगवन !मेरे बाप को लम्बी उम्र देना , वक्त के बित्ते
वक्त बोला अब सम्भलो इन्हे पर बच्चे कहते है हे भगवन ! अब तो उठालो इन्हे ...................................
माँ बाप ने पेट कटा खुशियों से अपने लालो के लिए पर अब बच्चे गिनते है की कितना खर्चा है इनके इलाजो के लिए,
हम भी है बच्चे किसीके ,और किसी समय होंगे मात-पिता किसीके ......तो जैसा दोगे दुःख -पे - दुःख इन्हे उतने ही तुम भी पाओगे दुःख के पहाड़ चीने.........................................................
अंत हमेसा पक्ष में मेरा है फिर चाहे जमना कहे मुझे ये वेला है ,जैसा करो वैसा भरो , सुना कितना .......फिर भी रहना वैसा चाहे कहे कोई कितना ,गिरोगे किसी दिन ओंधे मुह तब आएगा रोना तुम्हे कितना ................
अंत में एक और बात ....जीना है तो जियो जी भर के - जीना है तो जियो जी भर के पर मात-पिता के चरणों से नहीं दूर हटके
धन्यवाद
मतलब आज की पीढ़ी और पहले की पीढ़ी में अंतर जो आज हर जगह देखने को मिलेगा .......................
कुछ इसही तरह मेरे मन के विचार है जो इस कविता में है ...........
आगया है ये कैसा समा नर्क सा लगे अब तो जीना यंहा ,पहले कभी बच्चा रोता था बाप की फटकार पर , लेकिन अब वही बेटा मरता है फटकार अपने बाप पर , जब तक था मनचाही चीजों का फेरा तो हे भगवन !मेरे बाप को लम्बी उम्र देना , वक्त के बित्ते
वक्त बोला अब सम्भलो इन्हे पर बच्चे कहते है हे भगवन ! अब तो उठालो इन्हे ...................................
माँ बाप ने पेट कटा खुशियों से अपने लालो के लिए पर अब बच्चे गिनते है की कितना खर्चा है इनके इलाजो के लिए,
हम भी है बच्चे किसीके ,और किसी समय होंगे मात-पिता किसीके ......तो जैसा दोगे दुःख -पे - दुःख इन्हे उतने ही तुम भी पाओगे दुःख के पहाड़ चीने.........................................................
अंत हमेसा पक्ष में मेरा है फिर चाहे जमना कहे मुझे ये वेला है ,जैसा करो वैसा भरो , सुना कितना .......फिर भी रहना वैसा चाहे कहे कोई कितना ,गिरोगे किसी दिन ओंधे मुह तब आएगा रोना तुम्हे कितना ................
अंत में एक और बात ....जीना है तो जियो जी भर के - जीना है तो जियो जी भर के पर मात-पिता के चरणों से नहीं दूर हटके
धन्यवाद

