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Hansi, Harayana, India
these all poems are written by me...and my internal thinking

Tuesday, January 25, 2011

ऐ हवा ऐ हवा






एक दुःख से भरी कविता हवा के विषय में , पहले हवा और आज की हवा के बीच अंतर करते हुए अपने दिल के विचार मैं प्रस्तुत करता हूँ ......................................................

ऐ हवा ऐ हवा तू क्यों हो गयी है खफा ,ऐ हवा ऐ हवा तू क्यों हो गयी है खफा,
तेरी मिठास व् शीतलता गयी है कँहा ,तेरे से ही चल रहा था जीवन सुन्दर सुखमय

सारा तेरे से ही चल रहा था जीवन सुन्दर सुखमय सारा ,पर अब तेरे खोने से हो गया है जन जीवन दुखमय सारा -पर अब तेरे खोने से हो गया है जन जीवन दुखमय सारा,

तेरी प्यारी सुगंध करती थी मोहित हमे- तेरी प्यारी सुगंध करती थी मोहित हमे

,पर अब क्यों भर देती है इस तन को कष्टों से सारा , तेरे साथी है ये पेड़- पोधे

प्यारे , लेकिन ये भी नहीं रहे किसी के सहारे ,न हमारे - न तुम्हारे ,एक हम ही इस दुःख का कारण है , जो दिन-ब-दिन हैवान बने एक हम ही इस दुःख का कारण है , जो दिन-ब-दिन हैवान बने, चाहे हम कितने आन्दोलन करके बचाले इन्हे , पर इन अनंत ;आपार उद्योगों पर काबू कोंन करे , कर -कर के थक गए हम , अगर रहा इस तरह से जन जीवन सारा , तो रह गया है अब इस धरती पे जीवन कुछ दिन का सारा ................. अंत में मैं कहता हु ऐ हवा -ऐ हवा , अगर मैं कर सकू तुझे फिर से पहले जेसा तो ,कोई गम नहीं फिर तो चाहे लग जाये मेरा जीवन सारा .......................................


                                                          धन्यवाद




































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