रे रोशनी चले साथ सदा तेरे हम ..........
जब थमे तू रात को तेरे साथ ही थमे हम .........
हमे हुई तू प्राप्त ये है वरदान बड़ा हमारा ..पर जिसके नेत्रों से है वंचित
तू उसके है सरे सुने पल .......
तुझ से ही है जनजीवन सारा और हम .....
चले हम सब बिन चाबी के पर फिर भी चाहिये रोशनी का का सहारा और मन का दम.... हमे तो तू मिली उस दाता से पर फिर भी कुछ लोग है वंचित इस अमृत से .......जिनसे अनजान है हम ........
क्यों है सजा ये क्या खता है इनकी हमे मिली ख़ुशी इन्हें क्यों मिला गम .........
चलते चलते कहे हम ,उल्ल्हस से भरके कहे हम .की क्या नजारा है ये कुदरत का .............पर
वो भी हैं बेचारे जो कहे की ....कैसे लगे हैं हम ? ........
हे भगवन मेरी है आपसे यही विनती की जो है पृथ्वी पर नेत्रहीन उन सबको दे कुछ दुनिया से अलग दम-ख़म ....
हमे तो दिया तुने सबसे बड़ा रत्न .......
इनको भी दे कोई ऐसा यत्न जिनसे ये जी सके जिन्दगी में हर सुख के पल ....पल .......पल
धन्यवाद ...


