राहों की बाँहों में समा जाने को जी चाहता है ,जंहा भी ये जांए इनके साथ चले जाने को जी चाहता है ,क्या करे ये जीवन है बहुत छोटा सा ,नहीं तो इसके सनाटे में सिमिट जाने को जी चाहता है ........
मिलाती है ये प्यार से प्यार को , यार से यार को देखा जाये तो ये दुनिया है कितनी बड़ी .और अनगिनत राहें इसमें पड़ी फिर भी हर रहा को अपनाने को जी चाहता है ......................
जी चाहता है की जन्हाँ तक ये जाएँ इनके साथ चला जाऊ और देखू की कंहा ये हो खत्म इनके बारे में जान जाऊ ,दिलीख्वाहिश है की काश ये खत्म हो स्वर्ग में ,पर कंहा मेरे ऐसे कर्म की जो मेरा स्वर्ग में ताकने को जी चाहता है...............
मेरा तो अंत कभी होगा ,पर इन राहों का नहीं ,मेरी कविता का भी अतं होगा ,पर इसके विषय का नहीं .....
फिर आखिर में मैं कहता हूँ की कितनी सुहानी लगती है ये राहें सफर में ,इनके साथ चलते -चलते मेरा जीवन सफल हो जाए ऐसा मेरा जी चाहता है .......................................
धन्यवाद .
तो बस चलते रहिये...... सुंदर लिखा आपने...फोटो भी बहुत सुंदर है .......
ReplyDelete