चले है साथी कुछ करने हम भी ..............
जो दिल में है जस्बा दिखाएंगे उसे हम भी ...............
मत समझो हमे तुम कमजोर यारो , मत समझो तुम हमे बेडोर यारो , क्यूंकि थामेंगे डोर इस दुनिया की किसी वक्त में हम भी ...........
ये मत समझना की हमे अपने पे गरूर है , बस हम तो रखते है उचे ख्वाब उचे पहाड़ो के समान , पर इन उचे ख्वाबो को हकीकत बनाएँगे कभी हम भी .......................
दिल में है जस्बा कुछ कर दिखाने का ,की बनादे इस जनहान को एसा ,जिससे जाने जाये अलग से इस दुनिया में हम भी ...................
ये मन है बड़ा चंचल कैसे मैं काम करू , लेकिन फिर भी सोचता हूँ की , अगर रही प्रीत अपनों से अपनों की , और रही आशीर्वाद की महर अपनों की ,तो कढ़ दिखाएंगे इस दुनिया में हम भी ...........
धन्यवाद














